बनारस केसरी,वाराणसी : अगर दिन की शुरुआत हंसने-मुस्कुराने से हो, तो पूरा दिन बढ़िया बीतता है।
“एल.एल.बी. की पढ़ाई”
प्रोफेसर : अगर तुम्हें किसी को संतरा देना हो, तो क्या बोलोगे?
संता : ये संतरा तो…।
प्रोफेसर : नहीं… एक वकील की तरह बोलो…।
संता : मैं हेतराम पुत्र चेतराम निवासी शिकारपुरा, यू.पी. एतद् द्वारा, अपनी पूरी रुचि व होशो-हवास में और बिना किसी डर एवं दबाव में आए, इस फल, जो कि सन्तरा कहलाता है, और जिस पर मैं पूरा मालिकाना हक रखता हूं, को उसके छिलके, रस, गूदे और बीज सहित आपको देता हूं और इसके साथ ही आपको इस बात का सम्पूर्ण व बिना शर्त अधिकार भी देता हूं कि आप इसे काटने, छीलने, फ्रिज में रखने या खाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है…।
आप यह अधिकार भी रखेंगे कि
आप किसी भी अन्य व्यक्ति को यह फल
इसके छिलके, रस, गूदे और बीज के बिना या उसके साथ दे सकते हैं।
मैं घोषणा करता हूं, कि
आज से पहले इस संतरे से सम्बन्धित किसी भी प्रकार के वाद-विवाद,
झगड़े की समस्त जिम्मेदारी मेरी है,
और आज के बाद मेरा किसी भी प्रकार से इस सन्तरे से कोई सम्बन्ध नहीं रह जाएगा…।
प्रोफेसर बेहोश..!!!










