प्रयागराज : सास की इच्छा महाकुम्भ में स्नान की थी, चलने में असमर्थ थी, लायक बहु उन्हें स्नान के लिए कंधे पर ले आई ।
श्रद्धा और आस्था ऐसे ही होती है। बड़े से बड़ा भार भी भार नहीं लगता।
प्रयागराज : सास की इच्छा महाकुम्भ में स्नान की थी, चलने में असमर्थ थी, लायक बहु उन्हें स्नान के लिए कंधे पर ले आई ।
श्रद्धा और आस्था ऐसे ही होती है। बड़े से बड़ा भार भी भार नहीं लगता।
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