वाराणसी : शब-ए-बारात गुरुवार को मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां जोरो पर पर चल रही हैं। 13 फरवरी को मनाई जाने वाली इस विशेष रात को ‘क्षमा की रात’ भी कहा जाता है।मस्जिदों और घरों की सजावट हो रही है। कब्रिस्तान और उनके रास्तों पर साफ-सफाई के साथ प्रकाश की व्यवस्था की जा रही है। शब-ए-बारात पर बनने वाले हलुआ के लिए कई जगह दाल, सूजी और मेवा-मसाले की खरीदारी हो रही है।
रेवड़ीतालाब, लोहता, बजरडीहां, दालमंडी, मदनपुरा सहित अन्य मुस्लिम इलाके में लोग तैयारी में जुटे हुए हैं। मस्जिदों में रात में ठहरने और नमाज की तैयारी की जा रही है। मौलाना इस्माइल हक ने कहा कि इस्लामिक कैलेंडर का आठवां महीना शाबान है। शाबान के महीने की यह रात अफजल मानी जाती है। कहा जाता है कि इस रात बंदों के आमाल अल्लाह तआला की बारगाह में पेश किए जाते हैं। इस्लाम में साफ-सफाई को आधा ईमान माना गया है।
अल्लाह की रहमत बरसती है इस रात
इस पवित्र रात में अल्लाह की रहमत बरसती है और मुस्लिम समुदाय के लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाती है। एक महत्वपूर्ण परंपरा के अनुसार, लोग अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर उनके लिए दुआ करते हैं, जैसा कि पैग़म्बर हजरत मुहम्मद किया करते थे। मुस्लिम बंधू भी इस मुकद्दस रात में अपने गाँव स्थित कब्रिस्तान में जाएं और अपने पूर्वजों के लिए दुआ करें।









